Ayurvedic Herb Satyanashi


                                                  सत्यानाशी (कटूपर्णि) कि पहचान         
                                                                         

      

सत्यानाशी का फल चौकोर होता है जिसके पुरे पौधे पर कांटे होते है। इसमे राई के समान छोटे-छोटे श्यामले रंग के बीज भरे होते है। यह दहकते कोयलों पर डालने से भड़भड़ बोलते है। उत्तर प्रदेश में इसे भड़भड़ भी कहते है। सत्यानाशी के किसी भी भाग को तोंड़ने से पीला जैसा दूध निकलता हैं इसलिए इसका स्वर्णक्षीरी भी कहते है। लेकिन आयुर्वेद के नुसार, सत्यानाशी स्वर्णक्षीरी से पूर्णतः भिन्न है। आयुर्वेद के नुसार स्वर्णक्षीरी के नाम से जाना जाता है। यह वनस्पती कन्याकुमारी से काश्मीर से उत्तराखंड मे 3900 मीटर कि उंचाई पर प्राप्त होता है।

                                                     सत्यानाशी के फायदे  

1 रतौधी (रातमें न दिखाई देना) फायदेमंद

2 आंखो कि बीमारी मे लाभकारी

3 दमे कि बीमारी मे फायदेमंद

4 पेट के दर्द मे लाभकारी

5 पीलीया,काविळ रोग मे लाभकारी

6 मुत्र रोग मे कारगर 7 सिफलिस मे लाभकारी

8 कुष्ठ रोग मे और किसी भी प्रकार के त्वचा रोग मे लाभकारी

9 दादा-खाज-खुजली मे लाभकारी 10 विसर्प रोग मे लाभकारी मे

11 घाव,जखम सुखने मे लाभकारी

                                              सत्यानाशी ज्यादा सेवन करने से नुसान 

1 सत्यानाशी के बीजों का केवल षरिर के बाहरी अंगो पर ही प्रयोग करना चाहिए क्योकि यह विषैले होते है।

                                                     सिताराम सावजी उतेकर

                                          महा आयुर्वेदिक जड़ीबुटी सत्यानाशी

                                                    मो नं 9833696512  

विशेष जानकारी अगर किसी को त्वचा संबंधी बीमारी सफेद दाग सोरायसीस एज्जिमा लाल चट्टे,है तो उपर दिए गये फोन से जानकारी लिजिए


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