Ayurvedic Herb Atibala


                                                         अतिबला कि पहचान
                                                     



दुनिया में तमाम ऐसी जड़ी-बूटियां हैं, जो शरीर के लिए बेहद लाभदायक मानी जाती हैं। उन्हीं जड़ी-बूटियों में से एक अतिबला भी है। यह झाड़ीदार पौधा है, जो वर्षों तक हरा भरा रहता हैं। इसके तने गोल और बैंगनी रंग एवं रोयें बहुत ही मुलायम, कोमल, सफेद और मखमली होते हैं। इसकी पत्तियों से लेकर फूल कई औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं और यह कई आयुर्वेदिक उपचार में काम आते हैं। इसी कारण आयुर्वेद में इसके चूर्ण का प्रयोग दवा के रूप में होता है। अतिबला मुंह की बदबू, मसूड़ों का दर्द, बदबूदार पसीना, दांतों का दर्द, सिर दर्द जैसी कई समस्याओं में फायदा करता है।

अतिबला झाड़ीनुमा 2 से 4 फीट ऊंचा पौधा होता है। जिसका मूल और काण्ड (तना) सुदृढ़ होता है। इसके पत्ते हृदय आकार के 7-9 शिराओं से युक्त, 1 से 2 इंच लंबे और आधे से डेढ़ इंच चौड़े होते हैं। फूल छोटे पीले या सफेद और 7 से 10 स्त्रीकेसर युक्त होते हैं। इसके बीज छोटे, दानेदार, गहरे भूरे या काले रंग के होते हैं। यह देश के सभी प्रांतों में वर्षभर पाया जाता है। अतिबला को खिरैंटी या गोक्षुरादि चूर्ण के नाम से भी जाना जाता है।

आयुर्वेद में अतिबला के विभिन्न भाग जैसे बीज, जड़, छाल, फूल, पत्ता आदि को सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। लेकिन इसके पौष्टिक और उपचारात्मक गुणों के कारण बहुत-सी बीमारियों के लिए इसे आयुर्वेद में औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। अतिबला की छाल कड़वी बुखार निवारक, कृमि नाशक और जहर के दोष को दूर करने वाली होती है। इसके अलावा प्यास, त्रिदोष और वात पीड़ा को भी दूर करने वाली होती है। इसकी जड़ गर्भाशय से होने वाले रक्त स्राव में लाभदायक होती है। इस पौधे का दूध पेशाब संबंधी बीमारियों में लाभ पहुंचाता है। आयुर्वेद में अतिबला को बल बढ़ाने वाली पौष्टिक औषधियों में प्रधान स्थान प्राप्त है।

अतिबला के बीज पौष्टिक होते हैं और सीने की दिक़्कतों में लाभ पहुंचाते हैं। यह बच्चों की खांसी, वायु नालियों की जलन, बवासीर और सुजाक के लिए बहुत कारगर हैं। इसके पत्ते दातों की पीड़ा, कमर दर्द और बवासीर में उत्तम हैं। इसकी छाल पथरी और पेशाब संबंधी बीमारियों में लाभदायक होती है। अतिबला के जड़ का ठंडा काढ़ा बुखार के अंदर ठंडी औषधि के रूप में काम करता है। यह वीर्यवर्धक, बलकारक, रक्त बहने के विकारों और मूत्र संबंधित रोगों में काफी फायदेमंद है।

                                                            अतिबला के फायदे

1 दांत के बीमारीमें लाभकारी  

 2 खांसी के इलाज मे कारगर

3 बुखार,ताप मे लाभकारी   

4 शरिर मे शक्ती स्फूर्ति बढा़ने मे फायदेमंद

5 पेंट संबंधी बीमारी मे लाभकारी  

6 बवासीर,मुळव्याद मे लाभकारी

7 पेशाब संबंधी बीमारी मे लाभकारी  

8 महिलाओ कि मासीक धर्म मे फायदेमंद

9 योनि से असामान्य खून कि समस्या मे लाभकारी

10 पौरुष शक्ती और धातु,शीघ्रपतन,सेक्स पावर के लिए

11 आंखो के दर्द के लिए लाभकारी

12 डायबिटीज,मधुमेह मे लाभकारी

13 आर्थराइटिस मे लाभकारी 

14 घाव,जखम मे फायदेमंद

15 बिच्छू का जहर उतारने मे कारगर

                                           अतिबला का अधिक सेेवन करने से नुकसान

अतिबला मुंह में लार बनाने का काम करता है। इसलिए रात के समय इसका सेवन न करें। अन्यथा सोते वक्त मुंह से लार छूट सकती है।
अतिबला मेंस्ट्रुअल फ्लो को बढ़ाने का काम करता है। इसलिए पीरियड्स के दौरान इसका सेवन न करें। अन्यथा अधिक ब्लड लॉस की समस्या उत्पन्न हो सकती है।
चूंकि इसका कोई प्रमाण नहीं है कि गर्भावस्था के दौरान अतिबला का सेवन करना सुरक्षित होता है या नहीं। इसलिए प्रेगनेंसी के समय इसका सेवन चिकित्सक की सलाह पर करें।


                                                            सिताराम सावजी उतेकर

                                                       महा आयुर्वेदि जड़बुटी अतिबला

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