Ayurvedic Herb Dikamali
डिकामाली कि पहचान
डिकामाली एक प्रकार का गोंद है जो एक छोटे वृक्ष से पाप्त किया जाता है। इसके यह वृक्ष पार्वत्य प्रदेशो में विशेषतः कोकण,सौराष्ट,कर्नाटक,तामिलनाडु,आदि में होते है। मध्यप्रदेश में एवं बिहार में भी पाये जाते है। यह मंजिष्ठाकुल,रुबिएसी कि वनौषधी है। डिकमाली का छोटा वृक्ष 5-6 फुट उॅंचा होता है। कोई-काई वृक्ष 10-15 फुट उॅंचा भी पाया जाता है। इस वृक्ष से बहुत सी शाखायें निकलती है। ये शाखायें और काण्ड टेढे़- मेढ़े होते हैं। डिकातानी के पत्ते उसे 8 इंच लब्बे होते है। पत्र के डंठल के बीच में छोटे-छोटे उप पत्र होते है,इसके पत्र अमरुद के पत्तो के समान होते है,किन्तु ये उनके बड़े पत्ते होते है। डिकामली के फूल-पुष्प बसंत ऋतु मे आते है,जो रंग मे सफेद होते है। ये पुष्प प्रायः कनेर के पुष्प जैसे होते है,जो सायंकाल में खिलते है। इन पुषों से अच्छी सुगन्द फैलती है। थोडे समय बाद यह पुष्प पीले होकर सूखने लगते है। फूलों कि सुगन्द के कारण गुजरात में इसे मालन कहा जाता है।डिकामाली के फल आमरुत फल जैसे होते है,किन्तु छोटे गोल होते है,जिनके उपरी पुष्ठ भाग अनेक धारीया होती है। इन फलों मे तीन-चार कोष्ठ होते है। जिनमे बहूत से बीज होते है। कोकण कि और इन फलों को खाते है। जथा अचार भी बनाते है।
डिकामाली के फायदे
1 कृमिरो मे लाभकारी
2 वात रोग के लिए लाभकारी
3 बवासीर मे फायदेमंद
4 जखम या घाव भरने मे मदतगार
5 पेट जैसी समस्या के लिए लाभकारी
6 नारु रोग के लिए फायदेमंद
7 सरदर्द के लिए कारगर
8 उल्टी,पेट फूलना मे लाभकारी
9 बुखार मे लाभकारी
10 खॉंसी में फायदेमंद
डिकामाली के नुकसान
1 डिकामाली एक वर्ष से अधिक पुरानी उपयोगी नही रहती
2 डिकामाली का प्रयोग प्रातः काल करना अधिक हितकारक कहा जाता है।
3 दो वर्ष से छोटे बच्चो को डिकामाली का चूर्ण माता के गाय के दूध के साथ देना चाहिऐ
4 उदर शुघ्दि के लिए इसकि मात्रा 1-3 ग्राम तक भी दि जाती है किन्तु इसके सेवन काल में स्निग्ध पदार्थ,घी,तेल इत्यादि भी दें
सिताराम सावजी उतेकर
महा आयुर्वेदि जड़बुटी डिकामाली
मो नं 9833696512
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