महा आयुर्वेदिक जड़ीबुटी बाकुची
बाकुची की पहचान
क्या आपने कभी बाकुची का नाम सुना है? शायद ही कभी सुने होंगे। जिन लोंगो को आयुर्वेदिक के बारे में जानकारी होगी,हो सकता है की वेे बाकुची बारें में जानकारी रखते हो,कि बाकुची क्या है,लेकीन अन्य लोंगों को बाकुची के उपयोग के बारें मे कुछ भी पत्ता नही होंगा। दरअसल देखने में तो बाकुची बिल्कुल एक साधारण पौधा लगता है,लेकिन यह बहुत काम कि चीज है। यह एक बहुत फायदेमंद औषधी है। बाकुची के पौधा बरसात के दिनों में बहुत पैदा होते है।यह एक चार फीट जक उॅंचे होते है,इनकि डालीयां सीधी होती है। इसके पत्ते ग्वार के पत्तों से मिलते जुलते होते है। इन पत्तों पर काले रंग के कुछ छोटे पड़ हुये रहते है। इन पत्तो के कोनो मे 1से 3 इंच तक लम्बे डड़ल निकलते है,और उन डड़लो के उपर फीके औ गहरे बैगनी रंग के अनेको छोटे-छोटे फूल आते है। इन फुलों का आकार तुलसी कि मंजरी कि तरह दिखलाई देता है।इन फूलो के बारीक और तोते के समान हरे रंग कि फलियां निकलती है,जो पकने पर काली पड़ जाती है।इन फलियों में काले रंग के बिज निकलते है इसे बाकुचे बीज कहते है।
बाकुची के फायदे
1 दांतो के रोंग मे फायदेमंद 2 श्रसनतंत्र विकारो में लाभकारी
3 दस्त को रोकने मे कारगीर 4 बवासीर,मुळव्याद मे लाभकारी
5 पिलीया,काविळ मे फायदेमंद 6 गभ्रनिरोधक,गर्भधारण को रोकने मे
7 फाइलेरिया,हांथी पाव मे लाभकारी
8 त्वचा रोग,औा सफेद दाग,कुष्ठ रोग मे फायदेमंद
9 कफ,खांसी मे कारगर 10 बहेरेपन मे लाभकारी
बाकुची अधिक सेवन करने से नुकसान
1 बाकुची के सेवन से पेंट कि संबंधित विकार उभर सकते है
2 ज्यादा बाकुची के सेवन से उल्टी हो सकती है
सिताराम सावजी उतेकर
महा आयुर्वेदिक जड़ीबुटी बाकुची
मो नं 9833696512
( विशेष जानकारी अगर किसी को त्वचा संबंधी बीमारी,सफेद दाग,सोरायसीस,एज्जिमा, लाल चट्टे,है तो उपर दिए गये फोन से जानकारी लिजिए)
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