Ayurvedic Herb Chakramard


                                                           पवाँड का परिचय
                                                 

                   
पवाँड को चकवड़, पवांड़, पवांर, चक्रमर्द भी कहा जाता है। चक्रमर्द कुछ हद तक कसौंदी की तरह देखने में होता है। पवाँड का पौधा थोड़ा गंधयुक्त होता है। इस पौधे का इस्तेमाल आयुर्वेद में बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता है, साथ ही इसमें बहुत सारी चीजें मिलाकर पवाँड़ कॉफी बनाया जाता है जो सेहत के लिए बहुत ही पौष्टिक होता है। इसके बीज 
                                                 पवाँड क्या है?

 साधारणतया चक्रमर्द 30-120 सेमी ऊँचा, गंधयुक्त, वर्षायु शाकीय झाड़ी होता है। इसकी शाखा-प्रशाखाएँ रोम वाले होती हैं। इसके पत्ते पिच्छल प्रकृति के संयुक्त, 6-12.5 सेमी लम्बे होते हैं। इसके पत्रक तीन के युग्म में चिकने, दुर्गन्धयुक्त होते हैं। इसके फूल पीले रंग के, छोटे, 2-2 के युग्म में लगे हुए होते हैं। इसकी फली 15-25 सेमी लम्बी, 4-6 मिमी चौड़ी, पतली, चार कोणों वाले, कुछ मुड़ी हुई तथा आगे का भाग नुकीला होता है। प्रत्येक फली में 25-30, चतुष्कोणीय, भूरे अथवा हरे रंग के, मेथी के समान पंक्तिबद्ध बीज होते हैं। इसका पुष्पकाल जुलाई से सितम्बर तक तथा फलकाल अगस्त से नवम्बर तक होता है।

                                             पवाँड का औषधीय गुण

                              आधासीसी या माइग्रेन से राहत दिलाये


 चक्रमर्द के 20-25 ग्राम बीजों को कांजी में पीसकर मस्तक पर लेप करने से आधासीसी के दर्द से आराम मिलता है।

-चक्रमर्द, हल्दी, दारुहल्दी, पीपर तथा कूठ को समान मात्रा में लेकर नींबू के रस में घोटकर आँखों में लगाने से नेत्र रोगों में लाभ होता है।

                                       गंडमाला/कंठमाला दर्द में

-10-20 ग्राम पंवाड़ की जड़ को नींबू के रस में पीसकर लेप करने से गंडमाला में लाभ होता है।

-पंवाड़ के 10-12 पत्तों में, फिटकरी तथा सेंधानमक मिलाकर, थोड़े जल के साथ पीसकर, गुनगुनी टिकिया बनाकर कंठमाला की गांठों पर बांधने से लाभ होता है।

                        मधुमेह या डायबिटीज को नियंत्रित करने में


रक्त में शर्करा को कम करने के लिए 10 ग्राम पंवाड़ की जड़ों को लेकर उसमें 400 मिली पानी में पकाकर चतुर्थांश शेष का काढ़ा बनाकर 20-30 मिली मात्रा में सेवन करने से लाभ होता है।

                                          कमर दर्द से

2-4 ग्राम पंवाड के भुने हुए बीजों को पीसकर, इसमें खांड़, गुड़ आदि मीठा और थोड़ा घी मिलाकर, लड्डू बनाकर खाने से कटिशूल (कमर दर्द) में लाभ होता है।

                            छाजन या एग्जिमा के इलाज में

 -50 ग्राम पवांड़ बीज चूर्ण को 1 ली गाय के मठ्ठे में 3 दिन भिगोकर लगाने से खाज खुजली, मुख की झांई या पिग्मेन्टेशन आदि दूर होती है।

                                    कुष्ठ के इलाज में 

-चकवड़ का बीज, विडंग दोनों को हल्दी, अमलतास की जड़, पिप्पली तथा कूठ में पीसकर लगाने से कुष्ठ के कारण जो घाव होता है, उसको ठीक होने में मदद मिलती है।

-चकवड़ के बीज को कांजी के साथ पीसकर लेप करने से सिध्म कुष्ठ में लाभ होता है।

                                     श्वित्र या सफेद दाग

  • काकमाची, चक्रमर्द, कूठ तथा पिप्पली इन 4 द्रव्यों को पानी में पीसकर, बकरे के मूत्र में मिलाकर लेप करने से श्वित्र में लाभ होता है।
  • चक्रमर्द के बीज, बाकुची, सरसों, तिल, कूठ, हरिद्रा, दारुहरिद्रा तथा नागरमोथा इन 8 द्रव्यों को समान मात्रा में लेकर, तक्र में पीसकर लेप करने से श्वित्र, कण्डू, द्रद्रु तथा विचर्चिका में लाभ होता है।
  •                     पवाँड सेवन के साइड इफेक्ट
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  • पवाँड़ (चक्रमर्द) के बीज बच्चों के लिए विषाक्त होते हैं। अत: इसका प्रयोग सावधानी पूर्वक करना चाहिए। यह आंतों के लिए हानिकारक है। नुकसान से बचने के लिए दही, दूध या अर्क गुलाब का सेवन अच्छा होता है।
  •                                                      
  •                                                      सिताराम सावजी उतेकर
  •                                                   महा आयुर्वेदि जड़बुटी चक्रमर्द
  •                                                        मो नं 9833696512
  •  विशेष जानकारी अगर किसी को त्वचा संबंधी बीमारी सफेद दाग सोरायसीस एज्जिमा लाल चट्टे है तो उपर दिए गये फोन से जानकारी लिजि

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