Ayurvedic Herb Babool
बबूल कि पहचान
बबूल क्या है?
यह बबूल की प्रजाति का पेड़ है। यह छोटा वृक्ष होता है, जिसमें कांटे होते हैं। इसकी छाल पतली तथा गहरे भूरे रंग की होती है। पुराना हो जाने पर काले रंग के हो जाती है। इसके पौधे से रस निकलता है, जिसका प्रयोग चिकित्सा के लिए किया जाता है। यह लम्बा, झाड़ीदार और कांटेदार वृक्ष होता है। इसके कांटे लम्बे तथा तीखे होते हैं। इसके पत्ते बबूल के पत्तों जैसे होते हैं, लेकिन उससे कुछ बड़े और गहरे हरे रंग के होते है। इसके फूल पीले रंग के होते हैं। इसकी फलियां लम्बी होती हैं। फलियां कच्ची अवस्था में हरे रंग की, चपटी तथा मुड़ी हुई होती हैं।
बबूल के फायदे
अधिक पसीना आने पर बबूल से लाभ
बबूल के उपयोग से कमर दर्द का इलाज
बबूल के इस्तेमाल से दाद (खुजली) का उपचार
घाव में बबूल के फायदे
खांसी में बबूल के फायदे
बबूल के औषधीय गुण से पेट के रोगों
भूख बढ़ाने के लिए बबूल
मुंह के छाले का इलाज
दांतों के रोग में
कंठ के रोग का इलाज
आंखों के रोग में
श्वसन-तंत्र संबंधित विकार में
मूत्र रोग का इलाज
वीर्य रोग (धातु रोग) में
स्वप्न दोष का इलाज
योनि के ढीलेपन की समस्या में
मासिक धर्म विकार में
हड्डी संबंधित रोग में
पेचिश में बबूल के
दस्त रोकने के लिए
सूजाक का इलाज
पीलिया का उपचार
रक्त-स्राव में बबूल से फायदा
- उबाल कर डालें: बबूल की फली का सेवन करने का सबसे लोकप्रिय तरीका उन्हें उबाल कर सूप या स्टू के रूप में डालना है। खाना पकाने की प्रक्रिया फली की बनावट को नरम करती है जिससे फली मुलायम हो जाती है। इसे अतिरिक्त स्वादिष्ट बनाने के लिए, जीरा या अजवायन जैसे मसाले मिला सकते हैं।
- चबाकर सेवन करें: बबूल की फली को चबाकर सेवन करना भी एक विकल्प है। इसे धीरे-धीरे चबाकर गायब होने तक खाएं। यह सेवन जोड़ों के लिए फायदेमंद होता है।
- औषधीय उपयोग: आप बबूल की फली का औषधीय उपयोग भी कर सकते हैं। इसे पीसकर गर्म पानी के साथ मिलाकर पी सकते हैं। इसे दवा के रूप में लेने से पहले वैद्य से परामर्श करें।
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महा आयुर्वेदीक जडीबुटी के बारे मे यह ब्लॉगिंग है