हांथीसूढ़ कि पहचानसमस्त भारत में मुख्यत पंजाब एवं झेलम के क्षेत्रों में सड़कों के किनारे एवं परती भूमि पर पाई जाती है। इसकी पुष्प मंजरी हाथी की सूड़ के समान होने के कारण इसे हस्तिशुण्डी कहते हैं। यह 30-45 सेमी ऊँचा, सीधा, शाखित, रोमश, वर्षायु शाकीय पौधा होता है। इसकी शाखाएं हाथ की उंगुली के समान मोटी तथा रोएंदार होती है। इसकी डालियों के शिरे पर सफेद फूलों के गुच्छे आते हैं। फूलों की मंजरी लम्बी तथा हाथी की सूड़ के समान अग्रभाग पर मुड़ी हुई होती है। इसकी मूल जमीन में गहराई तक गई हुई तथा बादामी रंग की होती है।
हांथीसूढ़ के फायदे
हस्तिशुण्डी कटु, उष्ण तथा सन्निपात ज्वरशामक होती है। यह स्तम्भक, तापजनक, मूत्रल, मार्दवीकारक, कफनिस्सारक, ज्वरघ्न, गर्भस्रावक, वेदनाशामक तथा उदर सक्रियतावर्धक होती है। इससे प्राप्त हेलीओट्रीन का परखनलीय परीक्षण में अवरोधक तथा सुरा सार में जीवाणुरोधी प्रभाव दृष्टिगत होता है।
आंखो कि बीमारी मे लाभकारी
कण्ठमाला या गालगंड़
गठिया या शरीर मे होने वाली गांठे
कुष्ठ रोग या त्वचा रोग मे लसभकारी
दांत खाज खुजली मे फायदेमंद
फोडो-फुन्सी मे लाभकरी
मानसीक रोग मे लाभकारी
बुखार या ताप जैसी बीमारी मे लाभकारी
जहीरे कीड़े का विष नीकाल मे लाभकारी
पेट दर्द मे लाभकारी
व्रण या जखम मे लाभकारी
हांथीसुढ़ के नुकसान
अगर इस औषधी का प्रयोग करने से पहले अपने डॉक्टर कि सलाह लें
सिताराम सावजी उतेकर
महा आयुर्वेदि जड़बुटी हांथीसूढ़
मो नं 9833696512
विषेश जानकारी अगर किसी भी प्रकार कि त्वचा संबंधी बीमारी सफेद दाग, सोरायसीस, एज्जिमा,लाल चट्टे है तो उपर दिये हुये नंबर से संपर्क किजिए
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें
महा आयुर्वेदीक जडीबुटी के बारे मे यह ब्लॉगिंग है