महा आयुर्वेदीक जडीबुटी हलदी
हल्दी क्या है?
एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक मसाला और औषधीय वनस्पति है। इसका रंग पीला होता है और इसे खाने, दूध, काढ़ा तथा दवाइयों में उपयोग किया जाता है। हल्दी में मुख्य तत्व करक्यूमिन (Curcumin) होता है, जो शरीर के लिए लाभकारी माना जाता है।- पौधा हरे लंबे पत्तों वाला होता है
- जमीन के अंदर पीले रंग की गांठ (राइज़ोम) होती है
- सूखाने के बाद इसे पीसकर हल्दी पाउडर बनाया जाता है
- स्वाद हल्का कड़वा और सुगंध मिट्टी जैसी होती है
हल्दी का पौधा
कच्ची हल्दी
हल्दी पाउडर- शरीर की सूजन कम करने में मदद
- रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक
- सर्दी-खांसी में हल्दी दूध उपयोगी
- त्वचा के लिए लाभकारी
- घाव भरने में मदद
- पाचन सुधारने में सहायक
- जोड़ों के दर्द में राहत मिल सकती है
- एंटीऑक्सीडेंट गुण शरीर की रक्षा करते हैं
- ऊर्जा: 350 कैलोरी
- प्रोटीन: 8 ग्राम
- कार्बोहाइड्रेट: 65 ग्राम
- फाइबर: 20 ग्राम
- आयरन: अच्छा स्रोत
- पोटैशियम और मैंगनीज मौजूद
- करक्यूमिन सक्रिय तत्व
सामान्य रूप से:- 1 से 3 ग्राम हल्दी पाउडर रोज पर्याप्त माना जाता है
- हल्दी दूध में लगभग आधा से 1 चम्मच
- ज्यादा मात्रा लेने से पेट में जलन हो सकती है
- गर्म दूध में
- शहद के साथ
- काढ़ा बनाकर
- सब्जी और भोजन में मसाले के रूप में
अधिक मात्रा में लेने से:- पेट में गैस या जलन
- एसिडिटी
- दस्त की समस्या
- कुछ लोगों को एलर्जी
- खून पतला करने वाली दवा लेने वालों को सावधानी
यदि आपको ये समस्याएँ हैं तो डॉक्टर से सलाह लें:- पित्त की समस्या
- किडनी स्टोन
- गर्भावस्था में अधिक मात्रा
- डायबिटीज या ब्लड थिनर दवाइयाँ
आयुर्वेद में हल्दी को प्राकृतिक एंटीसेप्टिक और रोगनाशक माना गया है। इसे त्वचा, पाचन और शरीर शुद्धि के लिए उपयोग किया जाता है।
हल्दी की पहचान
हल्दी के इमेजेस
हल्दी के फायदे
पौष्टिक तत्व (100 ग्राम हल्दी पाउडर में लगभग)
हल्दी कितने ग्राम लेना चाहिए?
हल्दी लेने का तरीका
हल्दी के नुकसान
डॉक्टर की जानकारी
आयुर्वेद में महत्व
महा आयुर्वेदीक जडीबुटी
सिताराम सावजी ऊतेकर







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